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                                                         या देवी सर्व भूतेषु , शक्ति रुपेण संस्थिता
                                                                                        नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
   
 
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नारायणी दादी का परिचय      
NARAYANI DADI MANGAL VANI
नारायणी - राज शिक्षा योजना
 
झुंझुनू वाली नारायणी दादी का करीब ७५० वर्ष पूर्व इस पवित्र धरा पर अवतरण हुआ। पूर्व जन्म में दादी द्वापर युग के महाभारत में श्री कृष्ण भगवान के सखा अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा थी। जब अभिमन्यु महाभारत युद्ध में वीर गति को प्राप्त हो गए। जब उत्तरा ने श्री कृष्ण भगवान से अपने पति के साथ जाने की इजाजत मांगी, तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा कि तुम्हारे गर्भ में पल रहा पुत्र कलियुग का राजा परीक्षित होगा। इसी राजा परीक्षित का मोक्ष शुकदेव जी द्वारा भागवत कथा सप्ताह सुनने से हुआ। वर्त्तमान में हमे जो भागवत कथा सुनने को मिल रही है उसमे श्री कृष्ण भगवान के साथ साथ झुंझुनू वाली नारायणी दादी का भी बड़ा योगदान है। इसी कारण नारायणी दादी के त्रिशूल रूप की घर घर पूजा हो रही है। नारायणी दादी का त्रिशूल चिन्ह तीनो महाशक्ति गायत्री, लक्ष्मी एवं नवदुर्गा(पार्वती) का प्रतीक है। 
 
 
 
झुंझुनू वाली नारायणी दादी का करीब ७५० वर्ष पूर्व इस पवित्र धरा पर अवतरण हुआ। पूर्व जन्म में दादी द्वापर युग के महाभारत में श्री कृष्ण भगवान के सखा अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा थी। जब अभिमन्यु महाभारत युद्ध में वीर गति को प्राप्त हो गए। जब उत्तरा ने श्री कृष्ण भगवान से अपने पति के साथ जाने की इजाजत मांगी, तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा कि तुम्हारे गर्भ में पल रहा पुत्र कलियुग का राजा परीक्षित होगा। इसी राजा परीक्षित का मोक्ष शुकदेव जी द्वारा भागवत कथा सप्ताह सुनने से हुआ। वर्त्तमान में हमे जो भागवत कथा सुनने को मिल रही है उसमे श्री कृष्ण भगवान के साथ साथ झुंझुनू वाली नारायणी दादी का भी बड़ा योगदान है। इसी कारण नारायणी दादी के त्रिशूल रूप की घर घर पूजा हो रही है। नारायणी दादी का त्रिशूल चिन्ह तीनो महाशक्ति गायत्री, लक्ष्मी एवं नवदुर्गा(पार्वती) का प्रतीक है। 

 
 
 
हम दोनों पति पत्नि राजेंद्र माहेश्वरी एवं अरुणा माहेश्वरी नारायणी दादी की करीब अट्ठारह वर्ष से पूजा अर्चना कर रहे हैं। हम दोनों की शादी को करीब ढाई वर्ष बीत चुका था एवं हमे संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी। अधिकांश डॉक्टर्स की यही राय थी कि हमें कभी भी संतान सुख प्राप्त नहीं हो सकता। एक रात मुझे स्वप्न में विशेष अनुभूति द्वारा नथ दर्शन हुआ। हमने किसी पंडित जी से इस स्वप्न के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि आपको झुंझुनू वाली नारायणी दादी के दर्शन हुए हैं अतः आप झुंझुनू जाकर वहाँ उनके दर्शन कर अपनी मनोकामना रखें आपकी मनोकामना दादी अवश्य पूरी करेगी। कुछ दिन बाद हम दर्शन करने झुंझुनू गए वहाँ जाकर दादी से प्रार्थना की कि हे दादी जीवन में धन दौलत का तो आना जाना लगा रहता है परन्तु संतान सुख नहीं मिला तो जीवन निराशाजनक हो जाएगा। नारायणी दादी ने हमारी ऐसी सुनी कि सभी डॉक्टर्स कि राय झुठलाते हुए हमे दसवे महीने में ही एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उस दिन से आज तक उनकी कृपा से मंगल ही मंगल हो रहा है। 
 
हमने नारायणी दादी का मंगल पाठ पवित्र भादवा वदी नवमी से लगातार तेरह दिन तक लगातार मंगल पाठ करते थे। करीब हमने छह सात वर्ष लगातार मंगल पाठ किया भी। इसी दौरान आस पड़ोस के कई दादी भक्त आते रहते थे। एक दिन एक भक्त ने मंगल पाठ किस प्रकार करते हैं इस बारे में जानकारी चाही। संयोग से यह नारायणी दादी का सन २०१२ का पवित्र भादवा का महीना था इसी माह की भादवा नवमी के दिन करीब तेरह औरतो के साथ हमने मंगल पाठ की शुरुआत की। मंगल पाठ के अगले दिन उसी भक्त का टेलीफ़ोन आया कि इस तरह का सामूहिक मंगल पाठ हमारे घर पर भी कर सकते हैं क्या? हम दोनों ने यह विचार किया कि तेरह दिन तक लगातार मंगल पाठ करते थे उसकी जगह हर दादी नवमी को (अमावस्या के पहले वाली नवमी को दादी नवमी कहते है) घर-घर दादी भक्तो मंगल पाठ करेंगें। दादी नवमी का विशेष महत्व है।
 
इस तरह हमारा तेरहवां मंगल पाठ २९ अगस्त २०१३ गुरुवार दादी कि भादवा नवमी के रोज़ हनुमान वाटिका, कालवाड़ रोड, जयपुर में आयोजित हुआ। तब तक हजारों दादी भक्त इस मंगल आयोजन से जुड़ चुके थे। इसी दरम्यान हमने "नारायणी दादी सेवा संघ" की स्थापना कर उपरोक्त आयोजन को मूर्त रूप दिया। इसी रोज़ सामाजिक हित कार्य के रूप में नेत्र दान का भी संकल्प पत्र भरकर (मरणोपरांत) कई दादी भक्तों ने भरकर इस आयोजन में चार चाँद लगा दिए एवं "परहित सरिस धर्म नहीं भाई" को दादी भक्तों ने चरितार्थ किया। इस संस्था का धर्म और कर्म दोनों साथ साथ चलना ही मुख्य उद्देश्य है।
 
 
 
 
 
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